#1 Free Words and Spellings || शब्द और वर्तनी

हर माता – पिता अपने बच्चों को हिन्दी  ( Words and Spellings ) शब्द और वर्तनी सिखाना – पढ़ाना चाहते है। तो दोस्तों आज की पोस्ट में, मैं शब्द और वर्तनी का जानकारी उपलब्ध कराऊँगी। आप लोग इस Matra wale साइट से अपने बच्चों अच्छी पढ़ाई करा सकते है।

Words and Spellings Free PDF

छोटे बच्चों को हिन्दी मात्रा को सिखाने बाद हिन्दी शब्द का जानकारी देना चाहते है।( Words and Spellings ) शब्द और वर्तनी  आप अपने बच्चों को जरूर पढ़ाए शब्द वर्तनी को पढ़ाना अनिवार्य है। सार्थक एवं व्यवस्थित वर्णों के मेल से शब्द बनते हैं। क्योंकि मानव द्वारा उच्चारित ध्वनियाँ सार्थक एवं निरर्थक दोनों प्रकार की होती है।

तो देस्तों अब हम लोग शब्द और वर्तनी ( Words and Spellings ) को सिखते है। अगर आप पाठशाला को लिखेंगे तो देखीए कैसे होता है। पा   ठ   शा    ला  इन वर्णों को पास – पास लिखने से ही पाठशाला शब्द बनता है।

Words and Spellings
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शब्द- ( Words )

जैसे- वर्णों को जोड़ा गया   व् + इ + द् + आ + ल् + अ + य् + अ  वर्णों के मेल को शब्द कहते है।
व्यंजन + स्वर + स्वर की मात्राएँ = विद्यालय ,     प् + आ + ठ् + अ + श् + आ + ल् + आ  = व्यंजन + स्वर + स्वर की मात्राएँ =पाठशाला

सार्थक एवं व्यवस्थित वर्णों के मेल को शब्द कहते है। इसलिए शब्द केवल सार्थक ध्वनियों का ही मेल होते हैं। निरर्थक का नहीं। सार्थक ध्वनियाँ ही एक निश्चित अर्थ का प्रतीक है और हम उस अर्थ को समझते है। इससे भाषा का प्रवाह चलता है। शब्द के साथ – साथ उसके प्रतीक अर्थ का भी महत्व है। शब्द में प्रयोग होने वाली सार्थक ध्वनियाँ मिलकर एक प्रतीक अर्थ को बनाती है।

जिसे सुनते ही हमारे मस्तिष्क में अर्थ के साथ – साथ वस्तु का भी चित्र बन जाता है। इसी वस्तु से संसार का कार्य – व्यापार होता है व चलता है। जब ये शब्द वाक्य में प्रयुक्त होते हैं तब ये पद बन जाते हैं। कारण – वाक्य में आते ही शब्द – उपसर्ग, प्रत्यय, लिंग, वचन, कारक आदि के कारण रूप बदल लेता है और पद कहलाता है।

कभी- कभी यह ज्यों का त्यों भी रहता है, फिर भी हम उसे पद कहते है। क्यों ? तब हम ऐसा मानते हैं कि उसमें परिवर्तन हुआ।

जैसे – लड़का गेंद खेलता है।
इसमें ‘लड़का’ और ‘गेंद’ में कोई बदलाव नहीं आया है, फिर भी पद क्यों?

क्योंकि- 

लड़का अब लड़का नही वरन् वह जातिवाचक संज्ञा, कर्ता, एकवचन, पुल्लिंग, आदि विशेषताएँ धारण कर चुका है। इसलिए पद है।

आप इसे, ऐसे भी समझ सकते हैं रसायन विज्ञान प्रयोगशाला में आप एक साल्ट में दूसरा मिलाते है। कभी उसमें देखने में परिवर्तन दिखता है और कभी नही, किंतु एक सॉल्ट में दूसरा मिलते ही इ्कवेशन बदल जाते है। ठीक वैसे ही शब्द वाक्य में आते ही बदल जाता है। और पद कहलाता है।

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जैसे-  दिनेश के पुत्र विनय ने चिट्ठी लिखी।

दिनेश व्यक्तिवाचक संज्ञा, पुल्लिंग, एकवचन, संबंधकारक इन विशेषताओें के कारण दिनेश शब्द, वाक्य में प्रयोग होते ही पद बन गया है। इसीलिए तो वाक्य शब्दों से नही, पदों से बनते है।

वर्तनी – 

आपको पता है, शब्दों की सार्थकता उनकी वर्तनी पर निर्भर करती है। वर्तनी का अभिप्राय है।- शब्दों में प्रयुक्त होने वाले वर्णों को एक सही क्रम में लिखना, वर्णों से निकलने वाली ध्वनियों का सही मिलान करना जिससे शब्द सार्थक बन सके। बिना वर्णों के सही क्रम के हम शब्द की कल्पना भी नहीं कर सकते है। अतः हमें वर्तनी पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

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जैसे- 

( क ) केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अनुसार मानक हिंदी वर्तनी में संयुक्त वर्णों से बनने वाले शब्द पाई हटाकर तथा हलंत ( ् ) लगाकर बनाए जाते है।

जैसे – पक्का, बच्चा, ध्वनि, विद्यालय, द्वारा, चिन्ह, प्यार, सम्मान, प्रसंग, दिव्या

( ख ) ‘क्र’ और ‘कृ’ के साथ – साथ ‘श्रृ’ और ‘श्र’ के अंतर को समझकर प्रयोग में लें तथा उसी के अनुसार उच्चारण भी करें । जैसे – क्र में र तथा कृ में ऋ के साथ- साथ श्रृ में ऋ तो श्र में र का प्रयोग है।

( ग ) ‘महान’ अर्थात् को अब हलंत हटाकर लिखा जाता है। जैसे – महान, अर्थात ।

( घ ) ‘र’ के प्रयोग में विशेष समझदारी दिखानी चाहिए क्योंकि ‘र’ अपने स्वर सहित रूप में है और इससे पहले का व्यंजन आधा  ( स्वर रहित ) है तो यह उसके नीचे लगता है। जैसे – प्रिय, प्रेरणा, प्रेम आदि। यहाँ आप ‘प्र’ को इस तरह समझ सकते है। ‘प् + ‘र’ का मिला हुआ रूप है।

‘राष्ट’ में ( ट् + र ) का मिला हुआ रूप है। इसमें ‘र’ ( ् ) इस तरह लगा हुआ है।

अतः ‘र’ के विभिन्न रूप इस प्रकार है-

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  • ा् =   र् + अ – प्रेम, प्रिया, क्रिया, क्रम, भ्रम।
  • -ृ  =  र् + अ – पर्व, वर्षा, कर्म, स्वर्ग, आशीर्वाद।
  • र =  र् + अ – गाजर, भारत, रसीला, सागर।
  • ु =  र् + उ – रूपया, रूकना, रूचि, गुरू।
  • ू  = र् + ऊ – रूप, शुरू, रूमाल, रूठना।
  • ^ = र् + अ – ड्रम, ड्रामा, ट्रक, राष्ट्र, ड्राइवर।
  • ‘स’ के साथ ‘र’ का प्रयोग इस प्रकार होता है।

जैसे – स् + र =स्र – स्त्रोत , सहस्त्र। इसे ‘स्त्र’ समझा जाए ‘स्त्र’ नहीं। यह ‘स्त्रोत’ नहीं, ‘स्त्रोत’ है।

( ड. )  ‘ड-ढ’ और ‘ड़ – ढ़’ की वर्तनी तथा उच्चारण को भी विशेष रूप से समझने की आवश्यकता है।

जैसे- 

‘ ड’ – डरपोक, डर, डाल, डिब्बा, डाक।

‘ड़’ – बड़ा, लड़की, लकड़ी, खिड़की, सड़क।

‘ढ’ – ढेर, ढील, ढाबा, ढकना, ढोलक।

‘ढ़’ – पढ़ना, बढ़ई, चढ़ना, चढ़ाई।

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( च ) आजकल उर्दू से आए अधिकांश वर्णों का हिन्दीकरण मानक हो गया है, फिर भी .ज तथा .फ के उच्चारण का ध्यान रखें।

वर्तनी की शुद्धता निर्भर करती है, अभ्यास पर । भाषा में अभ्यास का विशेष महत्व है। तो चलो भाषा की वर्तनी की शुध्दता के लिए अभ्यास करें। उन शब्दों को समझें जिन्हें प्रयोग करते समय हम गलतियाँ करते है।

क्षमा बरात प्रातः  ऋण
आधार कक्षा हँसना अधीन
रामायण कोशिश पैसा सांसारिक
क्योंकि प्रसाद पड़ोस दीवाली 
उन्नति परीक्षा भाँति कवि
शुरू चढ़ाई स्वामी गुरू
बीमार उज्जवल त्योहार हिंदू
रूप परमात्मा यहाँ  श्रीमती
पूज्य दर्पण वाणी दयालु
वकील यकीन मालवी बहादूर
साधु बढ़ाई मांस हिरण
लक्ष्मी  आशीर्वाद औरत सौ
क्षत्रिय दवाई ऐसा गुण 
ऋषि नमस्कार गाँठ वन
शाखा विष  सन्यासी ह्रदय

 

अब मैं आप लोगों को शब्द और वर्तनी का कुछ महत्वपूर्ण जानकारी दे रही हूँ। इसको अच्छे पढ़े और समझे। 

  • सार्थक एवं व्यवस्थित वर्णों का मेल शब्द हैं।
  • शब्द अर्थ का प्रतीक होते हैं।
  • शब्द वाक्य में प्रयोग होते ही पद बन जाता है।
  • पदों से पदबंध एवं वाक्य बनते है।
  • शब्दों की सार्थकता उनकी वर्तनी पर निर्भर करती है।
  • हिन्दी मानक शब्दों की भाषा है।

इस जानकारी के अनुसार आप अपना पढ़ा हुआ क्या आपने सीखा ?

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प्रश्न- 1. सही शब्दों से रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
           ( पद, शब्द, वर्तनी, पदबंध, वाक्य ) 

(क) शब्दों की सार्थकता उनकी ———– पर निर्भर करती है।

(ख) सार्थक एवं व्यवस्थित वर्णों के मेल से ———बनते हैं।

( ग ) शब्द वाक्य में प्रयोग होते ही——— बन जाता है।

( घ ) भाषा ——- की सार्थकता बताती है।

( ड.) वाक्य ——– से बनते हैं।

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प्रश्न -2 – शब्द कैसे बनते है ?

उत्तर- सार्थक एवं व्यवस्थित वर्णों के मेल से शब्द बनते है। 

प्रश्न – 3- शब्द किसके प्रतीक होते हैं ?

उत्तर – शब्द अर्थ का प्रतीक होता है।

प्रश्न-4- वर्तनी का क्या अभिप्राय है ?

उत्तर –  वर्तनी का अभिप्राय हैं – शब्द में प्रयुक्त होने वाले वर्णों को एक सही क्रम में लिखना।

प्रश्न- 5. पद किसे कहते है ?

उत्तर – शब्द वाक्य में प्रयोग होते ही पद बन जाता हैं।

प्रश्न- 6. ‘क्र’ और ‘कृ’ से बनने वाले चार- चार शब्द लिखिए।

उत्तर –  कृपा, कृष्णा, मृदा, कृपाल, मृदुल, क्रम, प्रेम, भ्रम, नम्र, 

प्रश्न – 7- महान् और अर्थात् की सही वर्तनी लिखिए।

उत्तर – महान्, अर्थात्, भगवान् 

प्रश्न-8- ‘स’ में ‘र’ का प्रयोग करते हुए दो शब्द लिखिए।

उत्तर – स्त्रोत, साहस्त्र, अस्त्र, 

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तो दोस्तों अब आप ने शब्द और वर्तनी को अच्छी तरह जान ही गए होगें । कुछ मनोरजंन कहानी भी पढ़ लिया जाय पढ़ाई से साथ कहानी के अनुसार अपने जीवन में अच्छा नालेज भी लेना चाहिए तो चलिये दोस्तों मेरा भारत महान का अर्टिकल लिखती हूँ । जो आप लोगों को काफी पसन्द आएगा। मेरा भारत महान भारत में महान व्यक्ति थे। और आज भी महान लोग है, जो हम लोगों के लिए अनेक सुविधा उपलब्ध करा रहें है।

मेरा भारत महान 

यह देश की मिट्टी का असर है कि यहाँ हमेशा से ह महान व्यक्ति, चाचा नेहरू, मौलना आजाद, प्रेमचन्द, झाँसी की रानी , टाटा, बिरला, अंबानी, स्टील किंग लक्ष्मी मित्तल, एम. एफ. हुसैन, डॉ0 सारा भाई न जाने कितनी ही प्रतिभाएँ आती  रही  हैं और आती रहेंगी। हमारे पूर्वजों ने बड़े संघर्षो के बाद आजादी का तोहफा हमें दिया। जिसकी सुरक्षा परम कर्तव्य है।

नैतिक, मूल्यों एवं संस्कारों का बड़ा महत्त्व है। भारत एक कृषि प्रधान देश है। 70 % प्रतिशत आबादी गाँव में रहती है। 60 प्रतिशत आबादी युवा वर्ग की है और प्रत्येक युग एवं देश का भविष्य युवा होता है। हमारे पास गर्व करने लायक काफी उपलब्धियाँ है। हम हिमालय की चोटी पर पहुँचे, चाँद को अपना बनाया है, राजनीति औद्योगीकरण विज्ञान, शिक्षा, साहित्य सृजन और कला में आगे हैं। ए मेरे प्यारे वतन तेरे सूरज सदा जगमगाते रहे चाँद तारे यूँ ही मुस्कारते रहें।

ये संस्कार हमें इसी वतन से मिले कि गुरू को भगवान का दर्जा प्राप्त है। माता के चरणों में स्वर्ग है। श्रवण कुमार की माता – पिता भक्त कौन नहीं जानता ? यहाँ पर अतिथि देवो भवः है।

मेहमान जो हमारा होता है वो जान से प्यारा होता है हमारे वतन की सौधी खुशबू का ही कमाल है कि मदर टेरेसा, मीरा बहन और न मीरा बहन और न जाने कितने महान व्यक्ति इस देश को समर्पित हो गए। ऐसे प्यारे वतन के लिए क्यों न मन श्रद्धा से भर जाए ?

हम इस वतन को सलाम करते है जिसके एक किनारे अंडमान निकोबार तो दूसरी तरफ हिमालय है। ये हिमालय किश्वरे हिंदोस्तान, चूमता है तेरी पेशानी को आसमान। सलाम है उस वतन को जिसकी शान तिरंगा है। तरक्की की राहें खुली है। मेट्रों दौड़ती है तथा आसमान में अनुसंधान जारी है। इसलिए मेरा देश महान है।

 

Words and Spellings पर लिखा हुआ पोस्ट आपको कैसा लगा कमेन्ट करके जरुर बताइयेगा।

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