Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai

हाय मेरे प्यारे बच्चों आज मैं आप सभी को Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai  का पोस्ट लिखूँगी, जो बहुत ही महत्वपूर्ण है। बच्चो ! आप घर में अपने माता – पिता, भाई – बहनों व दादा – दादी से बहुत – से वाक्य सुबह- शाम सुनते हैं। उन वाक्यों पर आपने कभी ध्यान दिया होगा कि बोलने वाला संज्ञा या सर्वनाम शब्द है, परंतु वाक्यों को जोड़ने का काम जिन चिन्हों से या जिन विभक्तियों से या जिन परसर्गों से होता है, वे कारक ( Case )  होते हैं।

Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai || Karak ki Paribhasha

देखिए दोस्तों मैं आप के बच्चों को हिन्दी के मुख्य लेशन है। इस आर्टिकल में कारक को अच्छे ढ़गं से समझाऊँगी। जो बहुत ही बढ़ियाँ समझ में आयेगा। संज्ञा और सर्वनाम का क्रिया के साथ जोड़ने वाली विभक्तियों को, चिन्हों को, कारक कहते है। कारक ( Case ) को स्कूल में टीचर कक्षा – 1 से पढ़ाना शुरू कर देते है। बच्चें इसको कक्षा – 12 तक पढ़ता है। जैसे – जैसे क्लास पढ़ता है। उसी तरह से कारक कठिन और जटिल बनाया जाता है।

Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai in Hindi

जब बच्चे कम्पटिशन का तैयारी करते है। वहा भी कारक ( Case ) को पढ़ा जाता है। हिन्दी भाषा को लोग बहुत सरल भाषा मानते है। लेकिन हिन्दी सभी विषय कठिन हो जाती है। जब बच्चे हिन्दी पेपर कम्पटीशन में बैठते है। हिन्दी हमारी राष्ट्र भाषा है। जो भारत की भाषा का शान मानी जाती है। भारत के हर एक राज्य में हिन्दी बोला – पढ़ा जाता है।

मेरे भारत के कोई भी स्कूल हो, चाहे CBSC Board या अदर बोर्ड हो वहाँ हिन्दी की बुक जरूर पढ़ाया जाता है। इसलिए मुझे हिन्दी भी सारे बिषयों की तरह कठिन मानो और पढ़ों जो आप को अच्छी ढ़ंग से बोलने – लिखने आ जाएगें।

Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai
Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai

तो चलिए अब हम लोग कारक को समझे- 

कारक (case) Hindi me

कारक का पहचान हैन, को, से, के लिए, से , का , रा, में, पर।

अब ये वाक्य देखिए-

राम ने पत्र लिखा।

पिती जी के लिए दवाई चाहिए ।

थैलें में फल हैं ।

मोहन मेरा भाई है।

राम ने रावण को बाण से मारा ।

पेड़ से पत्ता गिरा ।

मेज पर पुस्तक है।

राम का भाई मोहन है।

उपर्युक्त वाक्यों में रेखांकित विभक्तियाँ कारक चिन्ह हैं। इन्हे कारक कहते है कारक को चिन्ह परसर्ग और विभक्तियाँ भी कहते हैं। इन चिन्हों से क्रिया पूर्ण होती है। उसे अर्थपूर्ण होने में कारक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संज्ञा और सर्वनाम का वाक्यों में कारक चिन्हों से ही संभव है और ये चिन्ह संज्ञा और सर्वनाम में बदलाव लाते है।

अतः संज्ञा और सर्वनाम का  क्रिया के साथ संबंध जोड़ने वाली विभक्तियों को, चिन्हों को, कारक कहते है। कारक व्याकरणिक इकाई ( वाक्य ) को अर्थपूर्ण बनाते हैं। कारक के बिना वाक्य अर्थपूर्ण नहीं हो सकता है। कारक के छह भेद हैं।

Karak Kitne Prakar Ke Hote Hai || कारक (case) in hindi

कारक के भेद ( Kinds of Case ) 

1- कर्ता कारक ( Nominative case ) 

2- कर्म कारक ( Objective case ) 

3-करण कारक ( Instrumental case ) 

4- अपादान कारक ( Ablative case ) 

5- संप्रदान कारक ( Dative case ) 

6- अधिकरण कारक ( Locative case ) 

कारक            चिन्ह

कर्ता            –           ने

कर्म             –             को

करण           –              से

द्वारा 

संप्रदान     –      को, के लिए

अपादान     –    से ( अलग होना )

अधिकरण    –    में , पर

1- कर्ता कारक ( Nominative case ) 

जो कार्य करे, वह कर्ता है। अर्थात कार्य करने वाले को कर्ता कहते है। इसका जिन्ह ‘ने’ है।

जैसे – 

मधुसूदन ने पत्र लिखा।

कुमुद दवा लाई।

श्रीयांशी ने खाना बनाया।

कामना ने पतंग उड़ाई।

2- कर्म कारक (Objective Case ) 

कर्ता का कार्य कर्म कारक है अर्थात कर्ता जो कार्य करता है, उसे कर्म कारक कहते है। इसका चिन्ह ‘को’ है।

जैसे –

पर्व ने मोहन को पढ़ाया।

पिता जी ने पुत्र को डाँटा।

अध्यापक ने छात्र को समझाया ।

राधिका ने सोहन को खाना खिलाया।

इन वाक्यों में कर्ता के कार्य हैं – पढ़ाना, समझाना, डाँटना, लिखाना, । इन्हें ही ही कर्म कारक कहते हैं।

3-करण कारक ( Instrumental case ) 

कर्ता जिस साधन से कार्य करता है, उसे करण कारक कहते है। अर्थात कर्ता का साधन ही कारण कारक है। इसका, चिन्ह ‘से’ और ‘के’ द्वारा’

जैसे – 

अरिसूदन मक्खन से रोटी खाता है।

राघव कलम से पत्र लिखता है।

किसान ने कुल्हाड़ी से लकड़ी काटी।

तन्मय बस से स्कूल जाता है।

इन वाक्यों में कर्ता के साधन हैं, मक्खन, कुल्हाड़ी, कलम और बस । इन्हें ही करण कारक कहते है, क्योंकि कर्ता इन्हीं साधनों से अपना कार्य संपन्न करता है। अतः ये करण कारक हैं।

4- अपादान कारक ( Ablative case ) 

कर्ता को जिससे भय, घृणा व ईर्ष्या के साथ – साथ अलग हने का भाव प्रकट होता हो, उसे अपादान कारक कहते है। अपादन कारक का चिन्ह ‘से’ है। जो अलग होने का भाव प्रकट करता है।

जैसे – 

वह साँप से डरता है।

पेड़ से पत्ता गिरता है।

नदी हिमालय से निकलती है।

साँप बिल से निकलता है।

इन वाक्य में कर्ता ‘साँप से है तो ‘नदी’ हिमालय से निकलती है। ये सब अलग होने के साथ भय आदि का भाव प्रकट कर रहे हैं। इसलिए अपादान कारक है।

5- संप्रदान कारक ( Dative case ) 

कर्ता जिसके लिए कार्य करता है, वह संप्रदान कारक है। अर्थात जिसके लिए कार्य किया जाए, वही संप्रदान कारक होता है। इसका चिह्न ‘केलिए’ और ‘को’ है।

जैसे- 

मोहन ने भिखारी को प्रसाद दिया।

डॉक्टर रोगी के लिए दवा लाए।

पिता जी बच्चों के लिए मिठाई लाए ।

माता जी घर के लिए सब्जी लाईं।

इन वाक्यों में कर्ता अपने लिए और दूसरों के लिए जो कार्य कर रहा है। उसे ही संप्रदान कारक कहते हैं। प्रसाद, मिठाई, दवा, सब्जी जैसे कार्य अपने लिए और दूसरों के लिए कर रहा है। यही संप्रदान कारक है।

6- अधिकरण कारक (Locative Case ) 

कर्ता की स्थिति का पता जिस कारक से चलता है, उसे अधिकरण कारक कहते है। अधिकरण अर्थात कर्ता की स्थिति का बोध कराने वाला कारक है। इसका चिन्ह ‘में’ और ‘पर’ है।

जैसे – 

इन वाक्यों में कर्ता की स्थिति का पता चल रहा है, इसलिए यह अधिकरण कारक है। अब यहाँ यह ध्यान देने की बात है कि ‘कर्ता’ क्या है ?

कर्ता है – संज्ञा या सर्वनाम।

संज्ञा और सर्वनाम ही कर्ता है, क्योंकि ये ही कार्य करते है। इनके ही सामाजिक रिश्ते हैं। इनके ही कर्म है।  इनकों ही कार्य करने के लिए साधनों की जरूरत है। इनके ही कर्मों के फल है और इन सबका पता हमें कारक चिन्हों के माध्यम से चलता है।

* अतः कारक कर्ता ( संज्ञा या सर्वनाम ) को अर्थपूर्णता देने का काम करते है।

* संबोधन कारक, नहीं है, क्योकि यह संज्ञा तथा सर्वनाम के स्थान पर प्रयोग होता है। क्रिया से इसका कोई संबंध नहीं है। यह अव्यय शब्द है। इसे अव्यय के रूप में पढ़ाया आएँ।

* कारक व्याकरणिक इकाई ( वाक्य ) को अर्थपूर्ण बनाते है।

* कारक छह प्रकार के होते है, पर कारक चिन्ह सात प्रकार के होते हैं। वे हैं, ने, को, से, के लिए, का, पर, में।

* के भीतर, के ऊपर, के नीचे, के बाद, के बीच, के अंदर अधिकरण कारक नहीं हैं। ये अव्यय शब्द हैं। इनकी स्वतंत्र सत्ता है।

तो बच्चों आप ने क्या सिखा हैं।  अब हमलोग प्रश्न – उत्तर सिखा जाएगा। 

प्रश्न – 1. सही शब्दों के द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।

( क) काम करने वाले को ——– कारक कहते हैं।

( ख ) जिस व्यक्ति के लिए कार्य किया जाए, उसे ———— कारक है।

( ग ) दो संज्ञा शब्दों के बीच का संबंध बताने वाले शब्दों को ——– कारक कहते है।

( घ ) —— की विभक्तियाँ में, पे, पर, ऊपर होती हैं।

प्रश्न – 2. सही कथन पर ( सही ) तथा गलत पर ( गलत ) का निशान लगाइए। 

( क ) कारक चिन्हों को विभक्ति तथा परसर्ग चिन्ह भी कहते हैं। (    )

( ख ) कार्य करने के लिए कर्ता जिस साधन का प्रयोग करता है, उसे कर्म कारक कहते है। (     )

( ग ) अपादन कारक की विभक्ति ‘से’ होती है। (    )

( घ ) संबोधन कारक में संंज्ञा के बाद ( ! ) का प्रयोग होता है।(    )

प्रश्न – 3. सही मिलान कीजिए।

( क ) कर्म कारक                                में

( ख ) अपादान कारक                        हे

( ग ) अधिकरण कारक                      को

( घ ) संबोधन कारक                        से

तो दोस्तो आज का मेरा पोस्ट कैसा लगा अगर अच्छा लगा हो तो अपनी बात को कमेंट बाक्स से लिख दिजिए। 

 

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