रक्षाबन्धन पर निबन्ध

आज का मेरा पोस्ट हैं रक्षाबनधन क्यों मनाया जाता है? रक्षाबन्धन  भी भारत का विशेष त्योहार है। जो आज के समय में इसका काफी प्रचलन चल रहा है।यह भाई – बहन का त्योहार माना जाता हैं यह श्रवण महिने में पूर्णिमा का मनाया जाता है। इस पोस्ट में मैं आप लोगों को रक्षाबंधन को क्यो, कैसे, मनाया जाता है। इसके बारे जानकारी उपलब्ध कराऊँगी।

रक्षाबंधन का महत्व क्या है ?, महाभारत में राखी कौन बांधा था? इतिहास में राखी को किसने – किसको बांधा था? मैं इस matra wale साइट में रक्षाबंधन के अच्छी नॉलेज दूँगी। जो आप सभी लोगो को पढ़ अच्छा लेगा ही उसके साथ में अच्छी जानकारी भी मिलेगी। तो दोस्तो आप सभी लोगो के घर में भी राखी मनाया जाता होगा उसके विषय में सबको जानकारी होती है। रक्षांबधन भाई – बहन का त्योहार है लेकिन कितने लोग यह नही जान पाते आखिर क्यो मनाया जाता है।

रक्षाबंधन पर निबन्ध
रक्षाबंधन पर निबन्ध

किस लिए रक्षाबंधन बाँधा जाता है। तो दोस्तो इस पोस्ट को आप अन्त तक पढ़े और दूसरो को भी पढ़ाए, इसमें रक्षाबंधन के त्योहार कैसे शुरू हुआ मैं इस आर्टिकल के माध्यम से सारी जानकारी दी हूँ।

प्रस्तावना

रक्षाबंधन भाई- बहनों का वह त्योहार है जो मुख्यतः हिंदुओं में प्रचलित है, पर इसे भारत के सभी धर्मों के लोग समान उत्साह और भाव से मनाते हैंं। पूरे भारत में इस दिन का माहौल देखने लायक होता है और हो भी क्यूँ ना, यही तो एक ऐसा विशेष दिन है जो भाई – बहनों के लिए बना है।

यूँ तो भारत में भाई- बहनों के बीच प्रेम और कर्तव्य की भूमिका किसी एक दिन की मोहताज नहीं है, पर रक्षाबंधन के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की वजह से ही यह दिन इतना महत्त्वपूर्ण बना है।बरसों से चला आ रहा यह त्यौहार आज भी बेहद हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

हिन्दू श्रावण मास ( जुलाई – अगस्त ) के पूर्णिमा के दिन मनाया जाने वाला यह त्योहार भाई का बहन के प्रति प्यार का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की दाहिनी कलाई में राखी हैं। उनका तिलक करती हैं और उनसे अपनी रक्षा का संकल्प लेती है। हालाँकि रक्षान्धन की व्यापकता इससे भी कहीं ज्यादा है।

राखी बाँधना सिर्फ भाई – बहन के बीच का कार्यकलाप नही रह गया है। राखी देश की रक्षा, पर्यावरण की रक्षा, हुतों की रक्षा आदि के लिए भी बाँधी जाने लगी है।

रक्षाबंधन का पौराणक महत्व

रक्षांबधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में है। वामावतार नामक पौराणिक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है। कथा इस प्रकार है।

रक्षाबन्धन  राजा बलि ने यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार का प्रयत्न किया, तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रर्थना की। विष्णु जी वामन ब्राह्मण बनकर राजा बलि से भिक्षा माँगने पहुँच गए। गुरू के मना करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी।वामन भागवान ने तीन पग में आकाश- पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया ।

उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो गई। नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बाँधकर उसे अपना भाई बना लिया। बदले में वे विष्णु जी को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावस मास की पूर्णिमा तिथि थी।

ऐतिहासिक महत्व

इतिहास में भी राखी के महत्व के अनेक उल्लेख मिलते है। मेवाड़ की महारानी कर्णावती ने मुगल राजा हुमायूँ को राखी भेज कर रक्षा – याचना की थी। हुमायूँ ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी । कहते हैं कि पत्नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरू को राखी बाँधकर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के दौरान सिकन्दर नही मारना चाहा बल्कि न मारने का संकल्प लिया ।

पुरू ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था। आज यह त्योहार संस्कृति की पहचान है और हर भारतीयों  को रक्षाबंधन त्योहार का अभिमान भी है।

लेकिन भारत में जहाँ बहनों के लिए इस विशेष पर्व को मनाया जाता है। वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो भाई की बहनों को गर्भ में ही मार देते है। आज कई भाइयों की कलाई पर राखी सिर्फ इसलिए नहीं बंध पाती क्योंकि उनकी बहनों को उनके माता- पिता ने इस दुनिया में आने ही नही दिया ।

यह बहुत ही शर्मनाक बात है कि जिस देश में कन्या – पूजन का विधान शास्त्रों में है। वहीं कन्या- भ्रूण हत्या के मामले सामने आते है। यह त्योहार हमें यह भी याद दिलाता है कि बहनें हम लोगो के लिए कितनी आवश्यक है जिनके घर में बहने नही हैं उनसे पूछों अगर अच्छी बहन हैं तो भाई का ख्याल हमेशा रखती है।  लेकिन आज के माँ – बाप पेट में ही लड़कीयों नष्ट कर दे रहे है। ना जाने  बाहर आने से उनको क्या तकलिफ पड़ती है।

महाभारत में राखी

महाभारत में भी रक्षाबंधन के त्योहार  का महत्व है। जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण जी से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे निपट सकता हूँ तब भगवान ने युधिष्ठिर का तथा उनके सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने कहा था। शिशुपाल का  वध करते समय कृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रोपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी का किनारा तुरंत चीरकर भगवान कृष्ण के  उँगली पर बाँध दी थी।

उस दिन  भी श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। युधिष्ठिर के जूआ में हार जानेपर  कृष्ण ने चीरहरण के समय उनको साड़ी से ढ़ककर लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था। रक्षा बंधन के पर्व में परस्पर एक- दूसरे की रक्षा  और सहयोग की भावना पर निहित है।

भारत में कैसे मनाते है रक्षाबंधन का त्योहार

आज के लोग तो राखी का त्योहार बड़े ही धूमाधाम से मना रहे है। राखी के दिन बहनों ने अपने घर अच्छा पकवान बनाती है और मिठाईयाँ भी अलग-अलग तरह की बनाती है। घर पर नही बना पाती तो बजार से मगाँती है। पहले लोग रक्षाबंधन के दिन रक्षासूत्र बाँधते थे लेकिन अब तो तरह – तरह कि डिजाइने वाले राखी चल गया है। त्योहार के दो – तीन दिन पहले ही लोग बड़े उत्सुक्ता  से इस त्योहार को आने का इतंजार करते है। सारी बहने अपने भाई के घर जाने को तैयारी करती है।

जिस दिन रक्षाबंधन रहता है उस दिन बहन अपने भाई को दाहिने हाथ में राखी बाँधती है। अपने रक्षा का याचना करती है और माथे पर तिलक लगाती मिठाई खिलाती है।  भाई भी  अपने बहनों को कुछ गिफ्ट देते है। और खुशी से इस त्योहार को मनाते है।

देखिये दोस्तों हर पुरूष को नारी का सम्मान करना चाहिए क्योकिं सारी स्त्रि किसी न किसी की बहन होती है। अगर आप किसी की बहन को इज्जत करते है तो दूसरा भी आप के बहन का इज्जत जरूर करेंगा। यह हम लोगों के उपर हैं जैसा चाहे वैसे समाज को बना सकते है।

हमलोग अपने देश के नागरीक है। हमलोगों से ही समाज बना है समाज में कुरूतीयाँ फैलती चली जा रही है। कही भी महिला सुरक्षा नही है । कही दहेज को लेकर कितने बहनों को टार्चर किया जाता हैं कि मानों उनकी बहने न हो। इस भ्रष्टाचार को इन सारे भाईयों समझ कर को मिटाना चाहिए हर एक महिला किसी कि बहन होती है। अपने भारत में बेटीयों को लक्ष्मी का दर्जा दिया गया है। लेकिन लोग कहा समझने वाले है।

बहनो को भी अपने भाई का इज्जत करना चाहिए । भाई का इज्जत सम्मान हर बहनों को रखना बहुत जरूरी होती है। बहन ही भाई के घर की इज्जत है, इसलिए सारी बहनों को मेरा अनुरोध है। अपने भाई का सम्मान बढ़ाये।

 2023 में रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त कब है?

रक्षाबंधन को सुबह 10ः55 से रात 7 बजे तक होगा । कुल समय 20 घण्टा है और दिन बुध्दवार को है। 30 अगस्त 2023 तो दोस्तो अब आप लोगो को मुहूर्त का भी जानकारी हो गया है।

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