भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए

आज का पोस्ट हैं भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए ( Language and Grammar ) बच्चों भाषा जानना बहुत महत्वपूर्ण टॉपिक है। बिना भाषा जानकारी से कुछ समझ में नही आता इसलिए आज मैं आप लोगों भाषा और की जानकारी उपलब्ध कराऊँगी। तो चलिए मेरे प्रिय बच्चों भाषा को सिखा जाए। और इस पोस्ट में मैने मात्रा से लेकर हिन्दी व्याकरण का बहुत सारा पोस्ट डाली जो आप को इस matra wale साइट पर उपलब्ध है।

भाषा शब्द संस्कृत की भाषा धातु से बना है, जिसका अर्थ है बोलना या कहना। इसका अर्थ वाणी को व्यक्त करना है। भाषा और व्याकरण ( Language and Grammar )  इसके द्वारा मनुष्य के भावों, विचारों और भावनाओं को व्यक्त किया जाता है। सामाजिक प्राणी होने के कारण मनुष्यों के लिए तो विचारों और भावनाओं का आदान – प्रदान करना और भी आवश्यक है।

भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए
भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए

इसी आवश्यकता क कारण भाषा का आविष्कार हुआ। पहले भाषा का मौखिक रूप प्रचलित हुआ फिर धीरे – धीरे सभ्यता के विकास के साथ – साथ भाषा का लिखित रूप भी विकसित हुआ। अतः हम कह सकते हैं कि, भाषा वह साधन है, भाषा और व्याकरण ( Language and Grammar ) जिसके द्वारा हम अपने विचारों का आदान – प्रदान करते  है।

भाषा के रूप भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए

मनुष्य़ दो रूपों में अपने विचार प्रकट करता है, बोलकर या लिखकर। इस प्रकार भाषा के दो रूप हुए – मौखिक भाषा और लिखित भाषा

  1. मौखिक रूप – इस माध्यम के द्वारा व्यक्ति बोलकर अपने विचार प्रकट करता है तथा सामने वाला व्यक्ति उन विचारों को सुनकर उन्हें ग्रहण करता है। भाषा के इस रूप को मौखिक भाषा या अमूर्त भाषा कहते है। 
  2. लिखित भाषा – इस माध्यम के द्वारा व्यक्ति लिखकर अपने विचार प्रकट करता है, जिनको पढ़कर ही समझा जाता है। भाषा के रूप को लिखित भाषा या मूर्त भाषा कहते है।

 

बोली

भाषा विस्तृत क्षेत्र में बोली जाती है। बोली का क्षेत्र सीमित होता है। यह किसी विशेष अंचल में ही बोली जाती है। इसका ना तो कोई लिखित रूप होता है ना ही कोई लिखित साहित्य होता है। हरियाणा की भाषा हिन्दी है। इसके कुछ भागों में बांगडू भी बोली जाती है। इसी प्रकार हिन्दी बिहार की भाषा हैं। इसके भागलपुर अंचल में अंगिका बोली जाती है।  अंगिका  बोली है। भोजपुरी, हरियाणवी, मैथिली, राजस्थानी अन्य प्रमुख बोलियाँ हैं।

भारतवर्ष में लगभग 1652 भाषाएँ और बोलियाँ बोली जाती हैं। यहाँ कुछ विदेशी भाषाएँ, जैसे अंग्रेजी, पुर्तगाली, फ्रेंच आदि भी बोली जाती है।

भाषा और बोली में अन्तर

भाषा और बोली में मुख्य अंतर यह है कि बोली सीमित या छोटे से क्षेत्र मेंं बोली जाती है। जबकि भाषा का क्षेत्र बोली की तुलना में अधिक विस्तृत होता है। कभी – कभी बोली विस्तार पाते – पाते भाषा का रूप ग्रहण कर लेती है।

लिपी

मौखिक ध्वनियों को लिखित रूप में प्रकट करने के लिए निश्चित किए गए चिन्हों को लिपि कहते है। 

संसार की विभिन्न भाषाओं को लिखने के लिए अनेक लिपियाँ प्रचलित हैं। हिन्दी, मराठी, नेपाली और संस्कृत भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। देवनागरी का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। ब्राह्मी वह प्राचीन लिपि है जिससे हिन्दी, बाँग्ला, गुजराती आदि भाषाओँ की लिपियों का विकास हुआ।

भाषा और व्याकरण बच्चों को कैसे सिखाए

देवनगरी बाई ओर से दाई ओर लिखी जाती है। यह बहुत ही वैज्ञानिक लिपि है। भारत की अधिकांश भाषाओँ की लिपियाँ बाई ओर से दाई ओर को ही लिखी जाती है। केवल ‘फारसी’ लिपि जिसमें उर्दू भाषा लिखी जाती है, यहाँ दाई ओर से बाई ओर को लिखी जाती है।

निम्न तालिका में विश्व की कुछ भाषाएँ और उनकी लिपियों के नाम दिए जा रहे हैं।

    क्रमांक   भाषा   लिपि
1.  हिन्दी देवनागरी
2. संस्कृत देवनागरी
3. अंग्रेजी, फ्रेंच, पोलिश, जर्मन, स्पेनिश आदि रोमन
4.  मराठी, नेपाली देवनागरी
5.  पंजाबी गुरमुखी
6.  उर्दू, अरबी, फारसी फारसी

 

राजभाषा हिन्दी तथा इसके रूप

हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, 14 सितम्बर, 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिंदी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। भारत के संविधान में हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दरजा दिया गया है। संविधान के अनुच्छेद 343 के अनुसार संघ की राजभाषा हिन्दी के लिए देवनागरी है।

उत्तर – प्रदेश, मध्य प्रदेश, क्षेत्रों में शासन और शिक्षा की भाषा हिन्दी ही है। इन सभी प्रदेशों में, स्थानीय स्तर पर हिन्दी की अनेक बोलियाँ बोली जाती हैं। पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र ने िसे द्वितीय भाषा के रूप में मान्यता दी है। द्रविड़ परिवार की भाषाओं जैंसे मलयालम, कन्नड़, तेलुगु और तमिल के शब्दों और हिन्दी के शब्दों में काफी समानता मिलती है।

संपर्क भाषा के रूप में बोलचाल में हिन्दी का प्रयोग भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में होता है। देश के अधिकांश क्षेत्रों में इसके अध्ययन की व्यवस्था है। यह साहित्य के साथ – साथ, ज्ञान – विज्ञान, वाणिज्य, शिक्षा – माध्यम तथा तकनीकी कार्यों की भाषा के रूप में विकसित हो रही है।

राष्ट्रीय ही नही, हिन्दी आज अपना अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप भी स्थापित कर चुकी है। विश्व के अनेक देशों जैसे फिजी, मॉरीशस, ट्रिनिनाद, सूरीनाम, गुयाना, कनाडा, इंग्लैंड, नेपाल आदि में हिन्दी बोली जाती है। इन देशों में भी वहाँ की भाषाओं के प्रभाव से हिंदी के विभिन्न रूप विकसित हुए हैं लेकिन ये सभी रूप हिन्दी के ही हैं और इन्ही सबके कारण आज हिंदी इतनी समृद्ध हुई है।

व्याकरण

व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुध्द एवं मानक रूप बोलना, समझना, लिखना तथा पढ़ना आता है। व्याकरण हमें यह भी बताता है कि कौन – सा वाक्य शुध्द है तथा कौन – सा अशुध्द। यदि कोई वाक्य अशुध्द है तो क्यों अशुध्द है। व्याकरण भाषा के नियमों का विश्लेषण करता है तथा इन नियमों को स्थिर करता है। समय के साथ-साथ भाषा में भी परिवर्तन होता जाता है। तथा व्याकरण भी इन परिवर्तनों को ध्यान में रखकर जहाँ आवश्यक हो, परिवर्तन करता है।

मुख्य बिन्दु

  • भाषा वह साधन है जिसके द्वारा हम अपने विचारों का आदान – प्रदान करते है।
  • भाषा के दो रूप हैं    1. मौखिक रूप       2. लिखित रूप
  • बोली सीमित या छोटे क्षेत्र में बोली जाती है जबकि भाषा का क्षेत्र बोली की तुलना में अधिक विस्तृत होता हैं।
  • मौखिक ध्वनियों को लिखित रूप में प्रकट करने के लिए निश्चित किए गए चिन्हों को लिपि कहते है।
  • 14 सितम्बर, 1949 को भारतीय संविधान सभा ने हिन्दी को भारत संघ की राजभाषा के रूप में  स्वीकार किया है।
  • व्याकरण वह शास्त्र है, जिसके द्वारा भाषा का शुद्ध एवं मानक रूप – बोलना, समझना तथा पढ़ना आता है।

तो मेरे प्यारे बच्चों आप हिन्दी व्याकरण में भाषा पढ़ लिए अब मैं आप को एक अच्छी प्रेरणादाय कहानी लिखूँगी। जो आप को पढ़ कर अच्छा लगेगा। इस कहानी का नाम हैं, बादशाह की कीमत 

बादशाह की कीमत

एक दिन अकबर बादशाह अपने दरबार में बैठा था। एकाएक उसने अपने दरबारियों से पूछा, दुनिया में हर चीज का मूल्य होता है। बोलिए, आप लोगों की दृष्टि से मेंरा मूल्य कितना हो सकता है? दरबारी क्या जवाब देते ? फिर भी बादशाह को उत्तर देना आवश्यक था। इसलिए एक दरबारी ने सोच क कहा, जहाँपनाह, हम आपका मूल्य कैसे आँक सकते हैं ?

दिल्ली की धरती पर हीरेस मणिक, मोती, सुवर्ण आदि बिछा दिए जाएँ तो उनका जो मूल्य होगा, उतरना मूल्य आपका मूल्य हो सकता है। इतने में दूसरा दरबारी बोला, जहाँपनाह, सिर्फ दिल्ली की धरती पर ही नहीं, पूरी सल्तनत की धरती पर सभी जवाहरात बिछा दिए जाएँ तो उनका जो मूल्य होगा, उतना मूल्य आपका हो सकता है।

बादशाह ने बीरबल से पूछा, बीरबल तुम बोलो, मेरा मूल्य कितना है ? बीरबल ने उत्तर दिया, जहाँपनाह, आपका मूल्य सवा दो रत्ती भर सोने जितना है। यह सुन कर सभी दरबारी स्तब्ध रह गए। सबको यही लगा कि बीरबल के जवाब में जरूर कोई रहस्य छिपा हुआ है।

एक दरबारी ने गुस्से में आ कर बीरबल से कहा, यह कैसी बदतमीजी है। क्या बादशाह सलामत का इतना ही मूल्य है ?
इतने जवाब में बीरबल ने एक प्रसंग सुनाया-

एकबार एक बहुत बड़ा धार्मिक उत्सव हुआ था। अमीर व गरीब सभी इस इत्सव में शामिल हुए थे। वहाँ भगवान की मूर्ति को तराजू में तौलने का कार्यक्रम भी था। तराजू के एक पलड़े में सोना, चाँदी, हीरे, मोती, आदि का ढेर लाया गया और दूसरे पलड़े में भगवान की मूर्ति रखी गई। लेकिन मूर्तिवाला पलड़ा नीचे ही रहा।

इतने में वहाँ एक गरीब बुढिया आई। उसने सोना- चाँदी और जवाहिरात को पलड़े से बाहर निकलवाया और अपने कान से ढाई रत्ती बजन की बाली निकाल कर तराजू के पलड़े में रख दी। ढाई रत्ती की वह बाली ही उस बुढ़िया की समूची संपत्ति थी। तराजू का बाली वाला पलड़ा नीचे हो गया तथा मूर्ति वाला पलड़ा ऊपर हो गया।

इस प्रकार भगवान का मूल्य ढाई रत्ती सोने के बराबर हुआ । भगवान तो तीनों लोकों के स्वामी हैं, जबकि आप तो केवल दिल्ल के ही स्वामी है। अतः आपका मूल्य पाव रत्ती कम ही होगा।

यह प्रसंग सुन कर बादशाह खुश हो गया । वह बोला, बीरबल, मेरा मूल्य ढाई रत्ती में पाव रत्ती कम बता कर भी तुमनेे मेरा मूल्य बहुत ज्यदा आंका है।

तो बच्चों यह कहानी आप को कैसा लगा अगर अच्छा लगा हो तो, अपनी बातो को कमेंट करके मुझे भी बता दिजिए ।

 

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